Monday, 30 October 2023

#पातावत #राठौड़

 


#पातावत
#राठौड़
मारवाड नरेश राव रिड़मलजी के 24 पुत्र थे
रिड़मलजी के पुत्र राव जोधोजी ने जोधपुर कि स्थापना की.
राव रिड़मलजी के पुत्र राव पातोजी पाली रोड पर स्तिथ #चौटीला ठिकाणे कि नीव सवत् 1483 कार्तिक सुदी सातम को रखी
राव पातोजी के वंशज पातावत हुवे
पातोजी के दो पुत्र
1.राव लुम्बोजी
2.राव हमीरसिह जी
हमीरसिह मा करणी के परम भक्त थे
मा करणी जी कि आज्ञा से हमीर सिह जी मा के साथ चोटिला छोड़ कर निकल गये
तथा मा करणी ने सवत् 1532 माघ सुदी सातम को करणु कि नीव रखी(छड़ी रोपी)
करणु ठा.हमीर सिह के 3 पुत्र हुवे
1.गगोजी ....हतुण्डी ठिकाणा
2.रतनसिह.... करणु
3.सबलसिह...जोधयासी ठिकाणा
#रतन सिह
रतनसिह के भी तीन पुत्र थे जो मला,कला,जयमला के नाम से प्रसिद्ध हुए
1.मलोजी..वापस चोटिला गये
2.कलोजी....करणु
3.जयमल....पडियाल ठिकाणा
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प्रिथमी सारी पालटी, बास बसै बीकांण ।
पाता कदै न पालटै, भीम जिसा कुलभांण ॥
मलां कलां जयमलां, तूं रिड़मलां रूप ।
नाहर भीमै नांव रौ, भलौ सरावण भूप ॥
कलोजी करणु के 9 पुत्र हुए
1.रामसिहजी...घटियाली ठिकाणा
2.नागराजसिह...करणु ठिकाणा
3.रणछोड़दास....आऊ ठिकाणा
4.हरीदासजी ....कैरला ठिकाणा
5.जसवंतसिह...चाडी,पलीना ठिकाणा
6.अखेराज..हिल्ली-किजरी
7.भगवानदास .....मिठडीयो ठिकाणा
8.फतेसिह...रोहिणा ठिकाणा
9.सुजानसिह....अगुणा गाव(पीपासर के आसपास)
नागराजजी करणु
नगराजजी के 4पुत्र थे
जिनमे मेघराजसिह करणु ठाकुर हुए
करणु के पातावत मेघराजसिह के वशंज है
मेघराजसिह दानवीर और सुशासन ठाकुर थे
करणु और आसपास के क्षेत्र में1630 से1637तक भयंकर अकाल पड़ा
इस दौरान मेघराज सिंह ने अपना सारा खजाना जनता के लिए खोल दिया
तथा आकाल राहात के तोर पर मड़ली नाडी (तालाब) का निर्माण करवाया
इस दौरान ठाकुरायणसा रायकवर
ने खजाना खाली हो जाने के दौरान अपने पास जमा कुछ पूंजी को भी जनता के लिए दे दिया
और जेसोलाई तालाब का निर्माण करवा के जनता को रोजगार दिया
रायकवर जैसा भाटी थे इसी के उपलक्ष में जैसोलाई नाम रखा गया
जिसकी खुदायी मे 2200रू. लगे जो आज 2200करोड़ के बराबर है
मेघराज सिह के 8पुत्र थे
जिसमे 6 नम्बर पर था वीर रुपसिह
गाव के एक गरिब किसान की जब गाये मीणा चुरा ले गये तब रुपसिहजी ने देऊ गाव के निकट सवत्1704 मे मीणो को ललकारा और भयंकर युध्द हुआ जिस मे रुपसिह जी का सर कट गया पर वो वीरता से लड़ते हुए गाये करणु ले आये तथा वीरगति को प्राप्त हुए
रुपसिह झुजार की पुजा होने लगी
रुपसिह के बाद अगली ही पीड़ी मे विख्यात वीर मौखमसिह जी हुवे
मौखमसिह जी ने नवाब खुरम से कई दिनो तक युध्द किया और नवाब को मार भगाया नवाब कि सैना से लड़ने वाले मौखमसिह सर कट जाने पर भी लड़रहे थे
मौखमसिह जी का घोड़ा सवत् 1850 मंगसर मास बदी2 (दुज )को करणु मे प्रवेश करता है जिस पर दोनों हाथों में तलवार लिए हुए वीर मौखमसिह का सर रहीत धड़ विराज मान था
गाव कि आखे नम थी छाती गर्व से फट रही थी लब्जो पर मौखमसिह के जयकारे....
नमन करता हु दादोसा वीर झुजार मौखम सिह जी को
मौखमसिह जी के दो पुत्र
करणु वीरो कि धरा है
यह वह धरा है जहां कई महापुरुषों के चरण पड़े
करणी मा के द्वारा खुदवाया गया कुआं करणु में आज भी मौजूद है
महान संत देवोजी महाराज व जिया राम जी महाराज की तपस्या स्थली है करणु
क्षेत्रफल की दृष्टि से 1990तक एशिया का दूसरा बड़ा गांव था करणु
जोधपुर बीकानेर और नागौर तीनों की सीमा से लगता है वर्तमान में 4 पंचायत और 10 से ज्यादा राजस्व गांव मैं विराजमान है मेरा करणु!
लेखक...मगसिह पातावत करणु

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