Friday, 18 August 2023

वर्तमान भारत के निर्माता " राजा मानसिंह प्रथम "

 

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वर्तमान भारत के निर्माता " राजा मानसिंह प्रथम " ही है ।।*
यदि आप इतिहास के जानकार है, तो आपको ज्ञात ही होगा, की भारत पर पहला इस्लामिक आक्रमण 636 ईस्वी में अली के समय ही हो गया ।। बलूचिस्तान लगभग अली के समय ही हाथों से निकल गया, जहां हिंगलाज देवी का शक्तिपीठ है ।।
उसके बाद मुहम्मद बिन कासिम आया, उसने सिंध और पंजाब तक के क्षेत्र तक मे इस्लाम को मजबूत कर दिया ।।
कासिम के बाद सिंध के गर्वनर जुनैद ने तो भारत के बीचों बीच मालवा तक पर आक्रमण किया, लेकिन नागभट्ट प्रतिहार के नेतृत्व में बप्पा रावल आदि ने उस आक्रमण को फैल कर दिया।।
उसके बाद भारत पर आक्रमणों या अत्याचार की एक लंबी श्रंखला चली ।। जैसे महमूद गजनवी , मुहम्मद गौरी, बख्तियार खिलजी, कुतुबुद्दीन ऐबक, अल्तमश, बलबन, जलालुदीन खिलजी, अल्लाउद्दीन खिलजी, गियासुद्दीन तुगलक, मुहम्मद तुगलक, फिरोजशाह तुगलक, खिज्र खां, बहलोल लोदी
सिकंदर लोदी, इब्राहिम लोदी ।।
यह तो मोटे मोटे पठान राजाओ के नाम है ।। और इनमें से एक भी मुगल नही है ।।
इन सभी मुस्लिम शासकों ने न जाने कितनी ही हिन्दू कन्याओ की इज्ज़त सरेआम नीलाम की है ।।
यह वह सृंखला है, जो दिल्ली से लेकर लगभग पूरे भारत मे उत्पात मचाये हुए थी ।। 636 ईस्वी में मुसलमानों का भारत पर पहला आक्रमण हुआ था , ओर तब से लेकर बाबर के आक्रमण तक कोई ऐसी शक्ति नही आई, जो इन पठानों को कमजोर कर सकें ।।
891 साल तक भारत इस्लामी संस्कृति से त्रस्त रहा ।।
दिल्ली के अलावा भी भारत के टुकड़े टुकड़े कर। अलग अलग साम्राज्य बना लिए गए ।
दिल्ली खुद एक अलग इस्लामिक देश बन गया । गुजरात सल्तनत नाम से अलग इस्लामिक देश बन गया ।मालवा सल्तनत नाम से अलग इस्लामिक देश था । साउथ की और बहमनी सल्तनत नाम से अलग देश था । बंगाल खुद अलग देश बन गया, जो एशिया की सबसे बड़ी सैनिक शक्ति में से एक था ।। कश्मीर अपना एक अलग इस्लामिक देश बन गया ।। भारतीय राजा छोटे मोटे सामन्त बनकर ही रह गए ।। उनके पास वह शक्ति नही बची थी, तो इस्लामिक आक्रांताओ से हिन्दुओ की रक्षा कर सकें ।।
हम इतने कमजोर हो गए, की शक्ति की बात करने वाले हिन्दुओ का भक्तिकाल आ गया । कि अब भगवान बचाये, तोहि बचे ।।
ऐसी स्तिथि में
क्या 800 साल पुराने साम्राज्य को उखाड़ पाना संभव था ?
1564 में आमेर और मुगल मित्र बने ।। और 1600 ईस्वी आने तक , यानी मात्र 36 वर्ष में 800 साल पुराना पठान साम्राज्य पूरे भारत से उखड़ गया ।।
उसके बाद हम इतने शक्तिशाली हो गए, की अगले 300 साल के अंदर न तो एक मुगल राजा बचा, न ही कोई प्रभावी पठान ।।
जो कार्य हम पिछले 800 सालों से नही कर पा रहे थे, राजा मानसिंह ने वह कार्य 25 वर्ष से भी कम समय मे कर दिया ।। इतना बड़ा कार्य करने के लिये उन्हें कितना दिमाग़ लगाना पड़ा होगा, कहीं कहीं कुछ ऐसे निर्णय भी लेने पड़े होंगे, जो आम जनता की समझ के बाहर हो ।।
आप इतिहास उठाकर देख लीजिए, 800 साल पुराने इन पठानों को अकबर मानसिंह की जोड़ी ने ही भारत से शक्तिहीन किया था ।।
मैं यहां उस समय के बुद्धिजीवी कहलाने वाले हिन्दू वर्ग की तरह अकबर का समर्थक नही बन रहा, उस समय के बुद्धिजीवियों ने तो अकबर को भगवान विष्णु का अवतार तक घोषित कर दिया था ।। मैं तो बस यह कह रहा हूँ, श्रीमानसिंह ने उस बुद्धिहीन अकबर के नशे की लत का फायदा उठाते हुए, शत्रु के हथियारो से ही, शत्रु का नाश कर दिया ।।
कश्मीर में हिन्दू संघार कांड हुआ । हम कितने हिन्दू रक्षा के लिए पहुंचे ??
दूसरा मणिपुर आज अहसाय क्यों है ,, सब कुछ होते हुए हम उनकी मदद क्यों नही कर पा रहे है । जबकि उस विषम परिस्थितियों में आमेर का राजा भारमल के पास तो कोई रास्ता ही नही था ,,।। मानसिंह जी के शासक बनने के बाद आमेर लगभग 1600 ईसवी में कुछ मजबूत हुआ । वरना भारमल जी उस समय संधि नही करते तो आमेर का सत्यानाश हो जाना था । आमेर खुद इस्लामिक देश बन जाता । आप और हम विस्मिल्लाह रहमाने रहीम कर रहे होते ।।
आमेर के पास लड़ने के साधन ,आर्थिक और सैनिक शक्ति बिल्कुल नही थी । ना ही भागोलिक हालत थे । कम सेना से तो बिल्कुल मुकाबला नहीं कर सकते थे
इसलिए आपको मानसिंह जी की बुराई या आलोचना करने का कोई आधार नहीं है।।
बाकी आप इतिहास उठाकर देख लीजिये, जहां कहीं भी मंदिर पर आक्रमण हुआ, हिन्दुओ पर अत्याचार हुआ, मानसिंह जी रक्षा के लिए पहुंच गए ।। चाहे वह काशी हो, या जगन्नाथ पूरी, या गुजरात, या हो असम ।।
आपने इतिहास में जो कुछ आजतक पढ़ा, उसकी आलोचना भी करते हो, की विदेशियो ने इतिहास बिगाड़ दिया ।और अब नए इतिहास को स्वीकार भी नही करते ।आपको वह पुराने ढोल ही बजाने है ।
👏👏
साभार गुरुजी

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